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झारखंड के उद्योग और समाजसेवा की मजबूत पहचान थे स्व. सीताराम रुंगटा, 38 वर्षों तक चाईबासा नगरपालिका का संभाला था नेतृत्व

स्व. सीताराम रुंगटा ने उद्योग, समाजसेवा और चाईबासा नगरपालिका के विकास में अहम योगदान दिया। जानिए उनके जीवन, शिक्षा, सामाजिक कार्यों और उपलब्धियों की पूरी कहानी।

जमशेदपुर/चाईबासा : झारखंड और ओड़िशा के खनन उद्योग, व्यापार और समाजसेवा के क्षेत्र में स्वर्गीय सीताराम रुंगटा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उद्योगपति होने के साथ-साथ वे एक कुशल प्रशासक, समाजसेवी और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता भी थे। उन्होंने न सिर्फ अपने पारिवारिक व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि चाईबासा और आसपास के क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वर्गीय सीताराम रुंगटा का जन्म दिसंबर 1920 में हुआ था, जबकि 17 अप्रैल 1994 को उनका निधन हो गया। उनके पिता स्वर्गीय मांगीलाल रुंगटा भी अपने समय के प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी थे। परिवार की व्यावसायिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए सीताराम रुंगटा ने उद्योग और सामाजिक सेवा दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई।

कोलकाता में हुई शिक्षा, फिर संभाला पारिवारिक कारोबार

सीताराम रुंगटा की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा कोलकाता में हुई। उन्होंने वर्ष 1940 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से आईएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद विद्यासागर कॉमर्स कॉलेज, कलकत्ता से बीकॉम की डिग्री हासिल की।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली। रुंगटा ग्रुप उस समय खनन क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा था। समूह का कारोबार आयरन ओर, मैगनीज ओर, क्रोमाइट, कायनाइट, ग्रेफाइट, लाइम स्टोन, डोलोमाइट और चीनी मिट्टी जैसे खनिजों के खनन से जुड़ा था।

खनन उद्योग को दी नई दिशा

सीताराम रुंगटा इलेक्ट्रो केमिकल्स ओड़िशा लिमिटेड में प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद पर कार्यरत रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में खनन उद्योग को आधुनिक सोच और बेहतर प्रबंधन के साथ आगे बढ़ाया।

वे इस्टर्न जोन माइनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे और उनके नेतृत्व में एसोसिएशन को नई दिशा मिली। इसके अलावा वे बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, बिहार इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, वनस्पति माइंस ऑनर एसोसिएशन, ओडिशा फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज और सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जैसे कई प्रतिष्ठित संगठनों से जुड़े रहे।

केंद्र और राज्य सरकारों में भी निभाई अहम भूमिका

स्वर्गीय सीताराम रुंगटा ने केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे कॉमर्स मंत्रालय, स्टील एंड माइंस मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और श्रम मंत्रालय से जुड़ी कई जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके थे।

इसके अलावा बिहार और ओड़िशा सरकार से जुड़ी कई समितियों में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। छोटानागपुर प्लानिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड, छोटानागपुर क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और रेड क्रॉस सोसाइटी सिंहभूम जैसी संस्थाओं में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

38 वर्षों तक चाईबासा नगरपालिका का संभाला नेतृत्व

सीताराम रुंगटा की सबसे बड़ी पहचान चाईबासा नगरपालिका के विकास पुरुष के रूप में भी रही। उन्होंने 1946 से 1950 तक चाईबासा नगरपालिका के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1951 से 1989 तक लगातार 38 वर्षों तक चाईबासा नगरपालिका के चेयरमैन पद पर बने रहे।

उनके लंबे कार्यकाल में चाईबासा शहर में कई विकास कार्य हुए। सड़क, जलापूर्ति, सार्वजनिक सुविधाओं और शहरी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में उनका योगदान अहम माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके कार्यकाल में नगरपालिका का संचालन बेहद व्यवस्थित और विकासोन्मुख था।

शिक्षा और समाजसेवा में भी निभाई अहम भूमिका

स्वर्गीय सीताराम रुंगटा शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहे। उनके पिता के नाम पर स्थापित मांगीलाल रुंगटा स्कूल आज भी हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है।

वे शंभू मंदिर चाईबासा, राजस्थान सेवा समिति, पिल्लई हॉल, करणी मंदिर, सूरजमल जैन चैरिटेबल ट्रस्ट और स्वामी स्वरूपानंद देश सेवा धर्म संस्थान कोलकाता जैसे कई सामाजिक और धार्मिक संस्थानों से जुड़े रहे।

इसके अलावा मारवाड़ी हिंदी विद्यालय चाईबासा, टाउन क्लब चाईबासा और शंभू मंदिर के मानद सचिव के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दीं।

कई प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़े रहे

सीताराम रुंगटा छोटानागपुर एजुकेशन काउंसिल, ऑल इंडिया मारवाड़ी फेडरेशन, बिहार बैडमिंटन एसोसिएशन, रांची विश्वविद्यालय सीनेट और माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी रहे।

समाज और सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें “पॉल हैरिस फैलो” सम्मान से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें “सिल्वर एलीफेंट अवार्ड” भी प्राप्त हुआ।

परिवार आज भी आगे बढ़ा रहा विरासत

स्वर्गीय सीताराम रुंगटा के दो पुत्र नंदलाल रुंगटा और मुकुंद रुंगटा आज भी परिवार की औद्योगिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वे अपने दादा स्व. मांगीलाल रुंगटा और पिता स्व. सीताराम रुंगटा के आदर्शों और कार्यों को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।

स्वर्गीय सीताराम रुंगटा का जीवन उद्योग, समाजसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण की मिसाल माना जाता है। चाईबासा और झारखंड के विकास में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

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