झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा में एक बेहद खतरनाक स्थिति उस समय पैदा हो गई, जब स्वर्णरेखा नदी तट पर दशकों पुराना 227 किलो वजनी जिंदा बम मिला। इस “मौत के सौदागर” को भारतीय सेना की 51 इंजीनियर रेजिमेंट (रांची) के जांबाज दस्ते ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया।
जैसे ही धमाके के साथ खतरा टला, पूरे इलाके में “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठी।
🪖 सेना के जांबाजों ने संभाली कमान
इस हाई-रिस्क ऑपरेशन का नेतृत्व:
- लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह
- कैप्टन आयुष कुमार सिंह
के द्वारा किया गया।
टीम में नायब सूबेदार आनंद स्वरूप सिंह, हवलदार कंवलदीप सिंह, हवलदार दलबीर सिंह, नायक सीएएस नौटियाल, लांस नायक मनोज और सेपर पंकज जैसे अनुभवी विशेषज्ञ शामिल थे।
इन सभी ने मिलकर बेहद सूझबूझ और साहस के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
🚨 जमीन से आसमान तक सख्त सुरक्षा घेरा
ऑपरेशन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि:
- कलईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन से उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया
- 1 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया गया
- आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
सेना ने मंगलवार से ही इलाके का भौगोलिक सर्वेक्षण और नदी के बहाव का गहराई से अध्ययन शुरू कर दिया था।
⚙️ ‘बंकर तकनीक’ से टाला गया बड़ा विस्फोट
विशेषज्ञों के अनुसार यह बम बेहद शक्तिशाली था और इसका अनियंत्रित विस्फोट बड़े इलाके को तबाह कर सकता था।
👉 इसे निष्क्रिय करने के लिए सेना ने खास ‘बंकर तकनीक’ अपनाई:
- बम को जमीन में करीब 10 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया
- चारों ओर बालू से भरी बोरियों का मजबूत घेरा बनाया गया
- विस्फोट की ऊर्जा को ऊपर की बजाय नीचे की ओर सीमित किया गया
टीम ने करीब 1 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर ऑपरेशन सेंटर बनाकर पूरी प्रक्रिया को कंट्रोल किया।
🌊 दशकों पुराना खतरा आखिरकार खत्म
सुवर्णरेखा नदी किनारे मिला यह बम दशकों पुराना बताया जा रहा है, जो लंबे समय से इलाके के लिए खतरा बना हुआ था।
सेना के इस सफल ऑपरेशन से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
📢 लोगों ने जताया आभार
जैसे ही ऑपरेशन सफल हुआ, इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने भारतीय सेना के जांबाजों के प्रति आभार जताया और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा।
📌 निष्कर्ष
बहरागोड़ा में 227 किलो के जिंदा बम को डिफ्यूज करना कोई सामान्य काम नहीं था। यह ऑपरेशन सेना की बहादुरी, तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई का शानदार उदाहरण है।